चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आतंकवाद के खात्मे में

चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आतंकवाद के खात्मे में

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इस्लामाबाद : चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान मंगलवार को इस बात पर सहमत हुए कि वे किसी भी देश, समूह या व्यक्ति को आतंकवाद के लिए अपनी सरजमी का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे. तीनो देशो ने बेचिंग में हुई पहली त्रिपक्षीय बातचीत के दौरान आतंकवाद से एक साथ मिलकर निपटने का संकल्प लिया. बैठक में इन देशो के विदेश मंत्रियो ने विकास, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कदमो पर चर्चा की. पाकिस्तानी विदेश कार्यालय की ओर से बैठक के बाद साझा किए एक संयुक्त बयान के अनुसार तीनो देशो ने आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए अपने दृढ संकल्प को दोहराया. जून में इस एक त्रिपक्षीय वार्ता करने पर सहमत होने के बाद इस तरह की ये पहली बैठक थी. चीन की विदेश मंत्री ने बीचिंग में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के अपने समकक्षो के साथ पहली चीन अफगानिस्तान पाकिस्तान विदेश मंत्रियो की बैठक आयोजित की. बयान में कहा गया, उन्होंने तीन देशो किसी भी देश, संगठन या व्यक्ति को किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां चलाने के लिए अपने सरजमी का इस्तेमाल नहीं करने देने की दृढ़ प्रतिबद्धता जाहिर की. बयान के अनुसार तीनो देश बिना किसी भेदभाव के सभी आतंकवादी संगठनो के खिलाफ लड़ने के प्रयासों में सहयोग और समन्यव का मजबूत बनाए जाने पर सहमत हुए. उन्होंने दोहराया कि अफगानिस्तान में हिंसा समाप्त करने के लिए सबसे अधिक समाधान एक व्यापक समावेशी शांति एवं सामंजस्य प्रक्रिया है जो पूरी तरह छेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित है. बयान के अनुसार इस संबंध में उन्होंने अफगान तालिबान से शांति प्रक्रिया में शामिल होने का अहवांन किया. तीन देश एक प्रगतिशील दृष्टिकोण के साथ त्रिपक्षीय आर्थिक सहयोग करने पर सहमत हुए. उन्होंने अपने संबंधो को सुधारने, पारस्परिक रूप से अपने हितकारी सहयोग को मजबूत करने, चीन की महत्वकांक्षी वन बेल्ट और वन रोड पहल के तहत संपर्क बढ़ाने और बिना किसी पक्षपात के आतंकवाद के सभी रूपों से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया. वे त्रिपक्षीय सहयोगो में तीन विषयों राजनैतिक आपसी विश्वास और सामंजस्य विकास सहयोग और संपर्क, सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए. चीन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियो की दूसरी वार्ता अगले साल काबुल में आयोजित होगी. भारत जानता है की चीन और पाकिस्तान की प्रतिबद्धता कितनी मजबूत है चीन को उसी हिसाब से आतंकवाद पर काम करके दिखाना होगा विश्व समुदाय भी ऐसा आशा करते है.

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