आवंटित राशि खर्च नहीं हो पाया

आवंटित राशि खर्च नहीं हो पाया

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नई दिल्ली : देश के शीर्ष लेखापरीक्षक कैग ने विभिन्न सरकारी योजनाओ के लिए आवंटित राशि में से काफी राशि बिना खर्च के रह जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है की इस तरह की योजनाओं के लिए बज़ट तैयार करने की प्रक्रिया को नये सिरे से व्यवस्थित करने की जरुरत है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कैग की संसद में पेश रिपोर्ट में इस बात पर गौर किया गया है कि विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि में से संबंद्ध मंत्रालयो ने काफी राशि लौटायी है जो कि खर्च नहीं हो पाई. इस तरह की योजनाओं में निर्भया कोष, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी कई योजनाये है जिनके लिए आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई और उसे लौटा दिया गया. दशको से हर साल या पांच साल पर रिपोर्ट में देखा गया है की लगभग सभी राज्यों में और केंद्र सरकार की योजनाओं में आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो पाती है. कभी कभी तो आधा से भी कम राशी खर्च होती है बाकी पैसा धरा रह जाता है. इसका मुख्य कारण यह है की सरकार कोई भी आये नौकरशाही तो वही रहती है जबतक कमिशन के पैसे पूरी तरह नहीं बटते है पैसे खर्च नहीं किए जाते है. चाहे इसके लिए जनता को कितना भी नुकशान उठाना पड़े, जनता महसूस करती है. राज्य और केंद्र सरकार को चाहिये की सख्त से सख्त कदम उठाया जाये. यह रिपोर्ट सरकार के 2016-17 खातो के विशलेषण पर आधारित है. रिपोर्ट सरकार के विनियोग खातो और उनकी लेखापरीक्षा निष्कर्षो को लेकर है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कैग ने इस पर गौर किया कि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों के अनुदान, विनियोग के 12 विभिन्न मामलो में 1,90,270 करोड़ का जरुरत से ज्यादा आवंटन किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के लिये आवंटित राशि में से काफी अधिक राशि 100 करोड़ से अधिक को लौटाया गया. विभिन्न प्रकार के अनुदानों, विनियोग की तहत दी गई इस प्रकार की 2,28,640 करोड़ की राशि, इसमे वर्ष के दौरान अतिरिक्त अनुदान भी लिया गया जो कि अंततः इस्तेमाल नहीं हुआ और वित्त वर्ष के आखिरी दिन उसे लौटा दिया गया. कैग ने कहा की इस विसंगति को दूर करने के लिये सुरुआत में ही बज़ट तैयार करने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से वयवस्थित करने की जरुरत है. इसके साथ ही बजट क्रियान्वयन की निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जाना चाहिये. रिपोर्ट के अनुसार निर्भया योजना के तहत महिला और बाल विकास मंत्रालय को आवंटित 286.27 करोड़ की राशि में से केवल 41.09 करोड़ रूपए ही वितरित किये गये. इसमे 245.18 करोड़ रुपये बिना खर्च के ही रह गये. कई अन्य योजनाओं में भी पूरी राशि खर्च नहीं हो पाई.

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