शहीदी हफ्ते में जमीन पर सोते है श्रद्धावान सिख

शहीदी हफ्ते में जमीन पर सोते है श्रद्धावान सिख

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नई दिल्ली : गुरुगोविंद सिंह और उनके चार साहिबजादों की कुर्बानी को भला कोई कैसे भूल सकता है. धर्म और देश के खातिर उन्होंने हस्ते हस्ते अपनी कुर्बानी दे दी. यही कारण है की सिख धर्म के साथ साथ अन्य धर्म के लोग भी गुरु गोबिंद सिंह जी का गुरु पर्व और चार साहिबजादों का शहीदी दिवस आ रहा है. 22 दिसंबर को गुरुगोविंद सिंह के बड़े साहिबजादों का शहीदी दिवस आ रहा है. 22 दिसंबर को गुरु गोविन्द सिंह जी के बड़े साहिबजादों का शहीदी दिवस है. ऐसे में शहीदी सप्ताह में श्रद्धावान सिख आज भी जमीन पर सोते है. इन सिखों का मानना है कि दिसंबर में कड़कती ठंड के बीच माता गुजरी और छोटे साहिबजादों को पंजाब के सरहद स्थित ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया गया था. छोटे शाहिबजादो को पंजाब के सरहद स्थित ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया गया था. छोटे शाहिबजादो को दीवारों में चुनवा दिया था और माता गुजरी ने यह खबर सुनते ही ठंडे बुर्ज में अपना दम तोड़ दिया था. उन्होंने हमारी लिए कितनी मुश्किलें सही और यदि ऐसे में हम बिस्तर पर आरत फरमाएं तो बेहद नाइंसाफी होगी. यही कारण है कि वह सिख जिन्होंने अमृत छका हुआ है और रोजाना नियमानुसार कीर्तन पाठ करते है, वह आज भी 22 दिसंबर से लेकर 27 दिसंबर तक जमीन पर सोते है. जो कट्टर धर्म का पालन करने वाले होते है वो अच्छाईयो के प्रति अपनी जान देते है इतिहास गवाह है. हिन्दू धर्म में भी कई राजा महाराजा की कहानी प्रचलित है. आज अनेक धर्म बना कर भोलीभाली जनता को ठगा गया है. दिमाग को वाश किया जाता है. फिर गलत को भी जनता सही मान लेती है. प्रयोग के तौर पर देखा गया है धर्म का आधार शांति, अध्यात्मिक, आत्मिक शांति होता है. जबकि इसका गलत उपयोग कर खानपान गलत कर गलत विचार अपनाकर धर्म को गलत बना दिया जाता है. जनता को होश ही नहीं रहता है कि क्या हो रहा है दलदल की भांति गलत रास्तो पर गलत धर्म पर डूबता चला जाता है. विवेक का ह्रास हो जाता है. दिमाग गलत दिशा में काम करता रहता है इससे सभी प्रकार से मानव की इंसानियत की क्षति होती है.

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