न्यूनतम पेंशन 7500 रूपए करने की वकालत 

न्यूनतम पेंशन 7500 रूपए करने की वकालत 

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पेंशनभोगियो के एक संगठन ने अपनी मांगो को लेकर गुरूवार को संसद के समक्ष धरना प्रदर्शन की तैयारी की है. संगठन न्यूतम पेंशन 7500 रूपए प्रतिमाह करने समेत अन्य मांगो पर दबाव बनाने के लिए यह प्रदर्शन करेगा. EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति ने कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत देश भर में सेनानिवृत कर्मचारियों को 7500 रूपए न्यूनतम पेंशन देने की मांग की है. वर्तमान में EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति के मुख्य समन्यवयक वीरेंदर सिंह ने कहा कि हम EPS 95 के सदस्य अपनी मांगो को लेकर केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय के सामने तीन दिन की भूख हड़ताल करेंगे. अगर हमारी मांगे नहीं मानी गयी तो 7 दिसम्वर को रामलीला मैदान से संसद तक विरोध प्रदर्शन करते हुए मार्च करेंगे. कर्मचारी पेंशन योजना 95 के तहत करीब 60 लाख पेंशन भोगी आते है. जिसमे से करीब 40 लाख लोगो को 1500 रूपए प्रतिमाह से कम पेंशन मिलती है और अन्य को अधिकतम 2000-2500 रूपए पेंशन मिलती है EPS-95 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के संचालित सामाजिक सुरक्षा योजना में से एक है. पेंशनधारियो के संगठन के मुताबिक यह मामला संसद में उठाया गया था. संसद में चली लंबी चर्चा के बाद श्रम मंत्रालय ने एक मामले ने इस मामले में एक और विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की थी. लेकिन फैसला लेने में देरी की वजह से 60 लाख वृद्धावस्था वाले परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. आल इंडिया EPS-95 पेशनर्स संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक अशोक राउत ने कहा की जब तक पेंशनभोगियो की 7500 रूपए न्यूनतम पेंशन की मांग पूरी नहीं होती है तब तक उन्हें 5000 रूपए के साथ महंगाई भत्ता दिया जाए. संगठन ने कोश्यारी समिति कि तीन हजार रूपए प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन की सिफारिश और महंगाई को देखते हुए यह मांग की है. समिति की सिफारिशो में पेंशन भोगियो और उनके जीवन साथी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा का प्रावधान भी शामिल है. सरकार को ये देखना है कि देश की तरक्की के लिए पेंशन का वोझ कितना है, पेंशनभोगियो के बच्चे माता पिता का बोझ उठाने में सक्षम क्यों नहीं है. सरकारी संस्था सही मैनेजमेंट नहीं होने के कारण कमजोर रहती है जबकि निजी संस्था बहुत आगे निकल जाती है और कई लाख लोगो को अच्छी रोजगार भी देती है.

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