धरती बचाने के लिए नैरोबी में जुटे दुनियाभर के नेता 

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नैरोबी : केन्या की राजधानी नैरोबी में सोमवार को पर्यावरण के मसलो पर निर्णय लेनेवाले विश्व के सबसे बड़े निकाय संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा की बैठक सुरु होने जा रही है. इसमे हिस्सा लेने 193 सदस्य देशो के प्रतिनिधि यहां पहुंच रहे है. तीन दिवसीय इस बैठक में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर रोक लगाने की कारवाई की दिशा में कदम उठाए जायेंगे. यहां संयुक्त राष्ट्र के संगठनों, विशिष्ट एजेंसियों, अंतर सरकारी संगठनों, ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियो से सजी तीसरी सभा के आरम्भ होने की पूर्व संध्या पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख एरिक सोल्हेम ने एक सन्देश में कहा कि प्रदूषण को काबू करना वर्तमान और भावी पीढियों के लिए अहम् बीमा पॉलेसी है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस साल की सभा पर्यावरण निरपेक्ष होगी और इसमे विविध रूपों में प्रदूषण का सामना करने वाले अतिरिक्त कार्यक्रमो की प्रधानता होगी. सम्मलेन का मकसद वायु मृदा, जलमार्गो व महासागरो के प्रदूषण का करने और रसायनो व कचरों के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर कई मूर्त प्रतिबद्धताए तय करना है. टिकाऊ विकास के लक्ष्य के संबंध में प्रदूषण पर एक राजनीतिक घोषणापत्र को स्वीकार करने की संभावना है. जिसका अभिप्राय यह संकेत देना होगा कि प्रदूषण और इस ग्रह के नष्ट होने के खतरे को समाप्त करने के लिए मानवजाति एक साथ कार्य कर सकती है. हिस्सा लेनेवाले विशिस्ट व्यक्तियों की सूचि में भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा और अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री मेई जेमिसन, नासा के प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक पॉल न्यूमैन, अंतर्राष्ट्रीय गायिका एली गाउल्डिंग वॉलीवुड अभिनेत्री दिया मिर्जा, चीन के पर्यावरण कार्यकर्ता वांग वेंबियानो और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फेमवर्क कन्वेंशन प्रमुख पैट्रिसिया एसपिनोसा शामिल है.
आमतौर पर देखा गया है कि छोटी छोटी चीजो के प्रयोग में जनता लापरवाही करती है जैसे गाँव में लोग सब्जी लेने के लिए थैला लेकर जाते है यहां प्लास्टिक का उपयोग कम होता है, थोड़ी जागरूकता अपनाए तो प्लास्टिक वैग का इस्तेमाल होगा ही नहीं. वही शहरो में पूरे भारत में देखा जाए रोजाना कई सौ किलो प्लास्टिक खपत होता है जो कचड़े में जाता है. दुनिया के सभी देशो में कितना हजार किलो प्लास्टिक वैग रोज खपत होता है. सभी प्रकार के गाड़ियों से निकलने वाला धुआं जिसे इलेक्ट्रिक गाड़ी बना कर कम किया जा सकता है. वैज्ञानिक का कहना है की घी के जलने से जो धुआं निकलता है उसमे ऐसे तत्व पाए जाते है जो वायुमंडल में हानिकारक गैस को कम करते है. फैक्ट्रीयो से निकलने वाले कचड़े को निपटान सही पूर्वक कर सकते है, पानी को साफ करनेवाले केमिकल है जिसका भरपूर उपयोग किया जा सकता है, अन्य जीव को हानि ना पहुंचे. कीकड़ के पौधे के जगह बरगद, नीम, पीपल और अन्य फलदार पेड़ लगाना भी बड़ा काम है, इस प्रकार हम देखते है की इन कदमो को उठा कर काफी हद तक वेहतर पर्यावरण बनाने की जरुरत है.

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