सुप्रीम कोर्ट का निर्देश 

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश 

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सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर आपत्तिजनक कटेंट जैसे चाईल्ड प्रोनोग्राफी और रेप वीडियोज पर रोकथाम के लिए केंद्र सरकार को कड़े निर्देश अक्तूबर के आखरी सप्ताह में दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि ऐसे ऑनलाइन पोर्ट्ल्स और हॉटलाइन नंबर्स लाए जाए, जिस पर कंटेंट की तत्काल शिकायत की जा सके. इससे उन लोगों के खिलाफ तुरंत गंभीर कदम उठाए जा सकेंगे जो इस तरह के अपराधों को अंजाम देते हैं.
दरअसल, केंद्र की ओर से गठित कमेटी की सिफारिशों पर सुनावाई करते हुए कोर्ट ने अपनी बातें रखी. इस कमेटी में केंद्र के प्रतिनिधि समेत गूगल,माक्रोसॉफ्ट, याहू से जुड़े कई तकनीकीज्ञ शामिल है. जिन्होंने पहले भी केंद्र को इस बारे में अपनी राय दिया था.
कमेटी की ओर से कई सलाह दी गई हैं, जिनमें कहा गया कि ऑनलाइन सर्च में इस्तेमाल होने वाले ऐसे किवर्ड्स को खोजा जाए और उन्हें ब्लॉक करे ताकि लोग इससे जुड़ा कंटेंट खोज न पाए. कमेटी के मुताबिक अगर आपत्तिजनक कंटेंट ऑनलाइन प्रसारित होता है तो इसकी जानकारी जुटाने के लिए कोई ऐसा तंत्र बनाए. इसके लिए फेसबुक ने सपोर्ट डेस्क की भी शुरुआत की है जो गंदे कंटेंट को फ्लैग करने में संस्थाओं की मदद करेंगे. इस अभियान की शुरुआत तब हुई है जब हाल के कुछ दिनों से आपत्तिजनक, भड़काऊ और गंदे कंटेंट को फेसबुक, गूगल और ट्विटर जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों की पूरी दुनिया में आलोचना हुई रहो रही है.
अक्तूबर महीने की शुरुआत में लंदन में हुए आतंकी हमले के बाद ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा ने फेसबुक, गूगल और ट्विटर जैसे इंटरनेट फर्म से कार्रवाई करने की मांग की थी जिसके बाद फेसबुक ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि वह जल्द ही अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद आतंक समर्थित कंटेंट को हटाने के लिए बड़ा कदम उठाएगा. और आतंकी गतिविधियों की भनक लगते ही सुरक्षा एजेंसियों को इसकी सूचना दी जाएगी, लंदन हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी.

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