अरुणाचल यात्रा पर विवाद क्यों 

अरुणाचल यात्रा पर विवाद क्यों 

175
0
SHARE

अरुणाचल प्रदेश : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अरुणाचल प्रदेश यात्रा का कडा विरोध करते हुए चीन ने कहा है कि भारत को ऐसे समय में सीमा विवाद को जटिल बनाने से बचना चाहिए जब द्विपक्षीय संबंध निर्णायक क्षण में है. राष्ट्रपति कोविंद ने कल अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की थी. कोविंद की अरुणाचल प्रदेश यात्रा के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने मीडिया से कहा, चीनी सरकार ने कभी भी तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को स्वीकार नहीं किया और सीमा मुद्दे पर हमारी स्थिति दृढ़ और स्पष्ट है. चीन नियमित रुप से किसी भी भारतीय अधिकारी की अरुणाचल प्रदेश यात्रा का विरोध करता आया है. भारत ने चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश का एक अभिन्न अंग है और भारतीय नेता राज्य की यात्रा करने के लिए उतने ही स्वतंत्र है जितने कि देश के अन्य किसी हिस्से की, ल्यू ने कहा, दोनों देश एक निष्पक्ष और उचित समाधान पर पहुंचने के लिए बातचीत के जरिये इस मुद्दे का समाधान करने की प्रक्रिया में है. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को शांति के माहौल के लिए लंबित अंतिम समाधान के लिए काम करना चाहिए.
उन्होंने कहा, चीन ऐसे समय में दृढ़ता के साथ भारतीय नेताओं की संबंधित क्षेत्र में गतिविधियों का विरोध जताता है जब चीन-भारत संबंध एक निर्णायक क्षण में है. ल्यू ने कहा, हमे उम्मीद है कि भारत इसी दिशा में काम करेगा और द्विपक्षीय संबंधों की सामान्य तस्वीर को बनाये रखेगा तथा सीमा मुद्दे को जटिल बनाने से बचेगा ताकि सीमा मुद्दे पर बातचीत के लिए अनुकूल स्थिति बनायी जा सके.
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) 3,488 किलोमीटर तक है. चीन ने गत छह नवम्बर को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के अरुणाचल प्रदेश के सीमाई इलाकों का दौरा करने पर भी विरोध जताया था. सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों पक्षों के विशेष प्रतिनिधियों द्वारा बातचीत के 19 दौर हो चुके है. उम्मीद है कि बातचीत का 20वां दौर अगले महीने नई दिल्ली में होगा. हालांकि तिथि की घोषणा अभी नहीं की गयी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जेची सीमा वार्ता के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि है.
सीधी सी बात है इतिहास गवाह है कि भारत का इतिहास कितना मजबूत और समृद्ध था, है. जीतने भी देश आस पास में दिखाई देते है सभी तो भारत से बने है. जंगलो को दुर्गम इलाको को साफ करके रहने लायक लोगो ने बनाया है. फिर इसमे सीमा विवाद का कोई प्रश्न ही नहीं होता है. भारत का इतिहास गवाह है विस्तारवादी नीति को नहीं अपनाता है नहीं तो बहुत सारे देश भारत के अंग रहते. अभी भले ही अंग नहीं है लेकिन अध्यात्मिक रूप से या आत्मिक रूप से और दिल से दिमाग से भारत से जुड़े है. अखंड आस्था रखते है की भारत एक सूर्य के सामान नियमित रूप से प्रकाश देनेवाला देश है. भारत अपना सब्र खो दे तो पृथ्वी पर से मानव का संस्कार खत्म हो जाएगा कितने देश आपस में लड़कर मर जायेंगे. बहुतो देश ने परमाणु और अन्य शक्तिशाली बम बना लिए है. भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जो अपने ऊपर दुख को झेलते हुए कई अन्य देश को शांति, खुशहाली और समृद्धि का कामना करते है और जहां तक हो सके मदद करते है.
चीन के राष्ट्रपति माननीय शी चिपिंग जी आत्मिक रूप से इन सभी बातो को स्वीकार जरुर करते है और आशा है सीमा विवाद जैसे मुद्दे उनके लिए कोई बड़ा मुदा नहीं है. शांति और अमन चैन पर विश्वास कायम रखेंगे यही दोनों तरफ कि जनता का आशा और विश्वास है.

LEAVE A REPLY