रसगुल्ले की लड़ाई में बंगाल आगे 

रसगुल्ले की लड़ाई में बंगाल आगे 

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भारत में लोकप्रिय मिठाई जलेबी को मानते है लेकिन रस्गुल्ले की बात कुछ और है बिना चवाए भी खाया जाता है. लोकप्रिय मिठाई रसगुल्ले पर हक को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच चली आ रही लड़ाई समाप्त हो गई है. अब यह तय हो गया है कि रसगुल्ला मूल रूप से पश्चिम बंगाल में बनना सुरु हुआ था. मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को रसगुल्ले के लिए भौगोलिक संकेत जीआई टैग मिल गया है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी ट्विट कर कहा की हमारे लिए यह खुशखबरी का मौका है 2015 से इस बात को लेकर लड़ाई चल रही थी की रसगुल्ले का मूल कहां है. एक तरफ ओडिशा का कहना है था कि सबसे पहले रसगुल्ला ओडिशा में बना जबकि पश्चिम बंगाल इसका आविष्कारक होने का दावा पेश कर रहा था. सालो तक चली जंग में अपना पक्ष पुख्ता करने के लिए दोनों राज्यों में स्पेशल कमेटियां बिठा दिया था. यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ओडिशा सरकार ने रसगुल्ले के लिए भौगोलिक पहचान जीआई टैग लेने की बात कही. ओडिशा के विज्ञान व तकनीकी मंत्री प्रदीप कुमार पाणिग्रही ने साल 2015 में दावा किया था कि 600 वर्ष पहले से उनके यहां रसगुल्ला मौजूद है. बंगाल ने दावा किया कि रसगुल्ले का अविष्कार नोबीन चंद्र दास ने 1868 में किया था. बहुत खुशी की बात है की रसगुल्ले को लेकर अधिकांश देश के लोग खुश है इस मिठाई में दूध का प्रयोग अधिक किया जाता है और स्वास्थवर्धक है, जिनको दांत नहीं भी है वो भी इस मिठाई को का लेते है. बच्चे भी आराम से इस स्वादिष्ट मिठाई का सेवन करते है.

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