भारत में करोड़पति की बढ़ोतरी 

भारत में करोड़पति की बढ़ोतरी 

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भारत में करोड़पतियो की संख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है. साथ ही भारतीयों की पारिवारिक संपत्ति में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रहा है. संपत्ति एजेंसी क्रेडिट सुइस की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों की संपत्ति वर्ष 2000 से सालाना 9.9 फीसदी की दर से बढ़ रही है जबकि वैश्विक औसत 6 फीसद का है. अनुमान है 2022 तक 3.72 लाख करोड़पति हो जायेंगे. भारतीय परिवारों के पास करीब पांच लाख करोड़ डॉलर 327 लाख करोड़ रूपए की संपत्ति है. तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग के कारण भारत में अमीरों की संख्या 2022 तक 7.5 फीसदी बढ़ोतरी के साथ तीन लाख 72 हजार तक पहुंचने का अनुमान है. तब भारतीय संपत्ति का आकड़ा 7.1 लाख करोड़ रूपए तक पहुंच जाएगा. देश में पिछले साल के दौरान भारतीयों की संपत्ति 451 अरब डॉलर 29 हजार 5 सौ रूपए का इफाजा हुआ और संपत्ति में वृद्धि के मामले में भारत दुनिया में आठवें स्थान पर पहुंच गया. पूरी दुनिया में निजी संपत्ति की बात करे तो यह 280 लाख करोड़ डॉलर के पार कर गई है. रिपोर्ट में कहा गया है भारत में संपत्ति तो बढ़ रही है लेकिन देश की 92 फीसदी वयस्क आबादी के पास सात लाख रूपए से भी कम की संपत्ति है. जबकि 0.5 फीसदी यानी आधे फीसदी 42 लाख वयस्कों की दौलत 65 लाख रूपए से ज्यादा है. कमोवेश दुनिया के अधिकांश देशो के साथ यही हाल है. प्रापर्टी और रियल स्टेट से लोगो की संपत्ति में सबसे ज्यदा इफाजा हो रही है. पारिवारिक संपत्ति में 85 फीसदी से ज्यदा संपत्ति प्रापर्टी के तौर पर है. भारत में आम परिवार का कर्ज सबसे बड़ी समस्या है. लेकिन अन्य विकाशील देशो के मुकाबले यह कम है. स्विट्ज़रलैंड सबसे ज्यदा अमीर देश है. जहां हर वयस्क की संपत्ति 3.5 करोड़ रूपए से ज्यादा है, उसके बाद आस्ट्रेलिया और अमेरिका का नंबर आता है. सभी जगहों पर ये देखा जाना जरुरी है कि कुछ देशो में जैसे आस्ट्रेलिया में जनसँख्या नियंत्रण में है उसी तरह भारत में भी बहुत जरुरी है जनसँख्या को नियंत्रण में रखना, ताकि सभी मूलभूत सुविधा और अधिकारों को सही प्रकार से दिया जा सके. जनता भी अपने कामो के बदले में अच्छी सुविधा को प्राप्त कर सकती है.

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