दीपा कोविंद को भाजपा का टिकट नहीं 

दीपा कोविंद को भाजपा का टिकट नहीं 

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से सगे भतीजे की पत्नी ने कानपुर देहात जिले के झींझक नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से टिकट मंगा था लेकिन पार्टी की स्थानीय इकाई से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय परचा भरा है. भाजपा ने इस सीट पर एक अन्य महिला को टिकट दिया है. राष्ट्रपति के भतीजे पंकज की पत्नी दीपा कोविंद ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव प्रचार सुरु कर दिया है. राष्ट्रपति के बड़े भाई प्यारेलाल कानपुर देहात के झींझक में रहते है. पंकज कोविंद उनके तीन पुत्रो में से एक है. जिला इकाई के अध्यक्ष राहुलदेव अग्निहोत्री ने कहा दीपा कोविंद ने झींझक नगरपालिका अध्यक्ष के लिए चुनाव में टिकट मांगा था. भाजपा अपने स्तर पर कायम है ऐसा देखा गया है नेता के घर में परिवार में किसी को टिकट न के बराबर ही देती है. भाई भतीजावाद को ज्यदा अहमियत नहीं देती है. इसी  कारण से टिकट नहीं दिया गया ऐसा मालुम पड़ता है. लोकतंत्र में राज्य और देश मजबूत हो इसलिए एक ही परिवार के समूह को आर्थिक और राजनीतिक शक्ति नहीं मिलना जरुरी होता है. देश में 48 राजनीतिक पार्टी है जिसमे एक दो को छोड़कर देखा जाए तो सभी में प्रमुख पदों पर अपने परिवार रिश्तेदार को ही प्रमुखता दिया गया है. आपस में एक हो ही नहीं सकते है क्युकि सभी चाहते है की मेरा पार्टी ही राज्य को चलाए, देश को चलाए. जबकि इनके पार्टी के नेताओं में मानसिक स्तर को देखा जाए तो बहुत निम्नस्तर का है. इसलिए जनता इनके साथ नहीं जुड़ना चाहती है, देश में करोड़ो जनता है जो अच्छे पढ़े लिखे है. वे आसानी से समझ जाते है की अमूख पार्टी में क्या होने वाला है. अब वो समय न रहा की एक नेता बहुत अच्छा किया देश और समाज के लिए तो आनेवाला सब दिन उस परिवार के साथ ही जनता घूमती रहे, समर्थन करता रहे. वो समय था लगभग अधिकांश जनता नासमझ थी, सरकार क्या होता है कुछ पता ही नहीं था. मोबाईल, इंटरनेट, प्रिंट मीडिया, दूरदर्शन, सभी प्रकार के आधुनिक उपकरण नहीं था. इस राज्य से उस राज्य में संवाद पहुचाने के लिए डाकिया हुआ करता था. मोटर वाहन नहीं था, प्लेन नहीं था, रेलगाड़ी नहीं थी, वैसे समय में कई दशको कई सदियों तक एक ही परिवार का राज्यसत्ता कायम रहता था. पीढ़ी दर पीढ़ी गलत ढंग से भी जनता पर शासन किया जाता था. अब भी ऐसा सोचकर चलने वाली सभी पार्टी का भविष्य खतरे में है. वैसे पार्टी का विलय आपस में किया जा सकता है. योग्यता के आधार पर नेता का चुनाव किया जा सकता है अच्छे विचार को अपनाया जा सकता है, तभी आज के समय में राज्य और देश के लिए कुछ किया जा सकता है.

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