न्यूनतम मजदूरी नहीं देनेवाले उद्योग को चालू रहने का हक नहीं :...

न्यूनतम मजदूरी नहीं देनेवाले उद्योग को चालू रहने का हक नहीं : अदालत

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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अपने कर्मचारियो को न्यूनतम मजदूरी नहीं देनेवाले उद्योगों को “चालू रहने का हक नहीं” है. अदालत ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत दंडात्मक प्रावदान मौजूद है. अदालत ने यह आदेश एक माली की याचिका पर सुनाया और उसके नियोक्ता केंद्रीय सचिवालय क्लब की याचिका खारिज कर दी. यह याचिका माली को दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के भुगतान से जुडी थी. न्यायमंत्री सी हरिशंकर ने क्लब को निर्देश दिया कि वह श्रम अदालत द्वारा माली गौतम सिंह को दी गई रकम के अलावे उसे 1 सितंबर 1989 से सितंबर 1992 के बीच दी गई मजदूरी और अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अंतर की रकम का भी भुगतान करे. अदालत ने कहा एक कर्मचारी को न्यूनतम मजदूरी नहीं देना कानूनन अनुचित और अक्षम्य है.


भारत में जो भी पिछड़ा राज्य है उसको तेज़ी से विकसित करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी देना सुरु किया जा सकता है. जनता के पास हर महीने पैसे आयेंगे जरुरी के सामान खरीदेंगे बच्चो को सही से देखभाल हो सकेगा, पढाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. शिक्षा ही वह हथियार है कि मानव इसे अपनाकर एक अच्छा जीवन जीने लगता है. दूसरा फायेदा ये होगा कि सभी जरुरी सामान बिकता है तो उस जगह का विकास होता है व्यापार बढ़ता है तो नये नये सामानों की मांग होती है, सरकार के पास टैक्स आने लगता है. सरकार मजबूत होने लगता है तो नये नये सुविधा मुहैया सुरु किया जाने लगता है. इस प्रकार स्वास्थ रोड, ऊर्जा, पार्क, पानी, सिचाई, विज्ञान, और अन्य मूलभूत सुविधा उपलव्ध होने लगते है. फिर वो राज्य विकसित हो जाता है. अभी क्या हो रहा है निजी स्वार्थ के कारण कुछ कंपनी या फैक्ट्री सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी को नहीं दे रही है. जबकि कंपनी का सालाना मुनाफा पिछले साल का देखा गया है कुछ कंपनी को छोड़कर बाकी का बहुत अच्छा रहा है. कितने कंपनी,फैक्ट्री तो कागजो पर न्यूनतम मजदूरी दिखा कर काम चला लेते है लेकिन मजदूर को देते नहीं है. भारत सरकार ने उन सभी कंपनी का लाईसेंस रद्द किया है इसलिये सरकार पर विभिन्न रूप से दवाब बनाया जा रहा है. लेकिन जनता को अब नये सिरे से उठने का मौका मिला है. ये सही समय है की नये व्यापार करनेवाले जनता मिले मौके को बैंको के जरिए सपोर्ट लेकर सही तरीके से नये व्यवसाय को सुरु कर सकते है. बैको और निजी संस्थान को भी चाहिये की सही तरीके से बिना भेदभाव के, बिना कमिशन लिये लोगो को सपोर्ट किया जाये ताकि बैंक व्यापारी और अन्य जनता को अच्छी सुविधा मिलता रहे.

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