राष्ट्रीय राज्यमार्ग का सही उपयोग

राष्ट्रीय राज्यमार्ग का सही उपयोग

264
0
SHARE

 
नई दिल्ली : सरकार विदेशो के तर्ज पर राष्ट्रीय राज्यमार्ग के लिये नई नीति लाने जा रही है. सड़क परिवहन और राज्यमार्ग सचिव युद्दवीर सिंह मालिक ने गुरूवार को कहा कि सरकार इसके लिये कुशल प्रबंधन नीति पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि एक बंद टोल नीति के बजाय हमें कुशल परिवहन प्रबंधन प्रणाली के जरिये खुली नीति का सुरुआत करनी चाहिए. उसमे सिर्फ आपको उतना टोल देना होगा जितनी सड़क का आप इस्तेमाल करेंग. उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआइ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मलिक ने कहा, हम जल्द इस नीति को लेकर आ रहे है एक साल या आगे हम इसे लागू कर पायेंगे. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देश यात्रा की दूरी के हिसाब से टोलिंग प्रणाली पर काम कर रहे है. मलिक ने कहा कि रोल आन, रोल आफ (रो –रो) फेरी की योजना सूरत के लिये भी बनाई गयी है जो दूसरी तरफ गुजरात के लिये होगी. इससे करीब ६०० से ७०० करोड़ रूपए की बचत होगी. प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह ६१५ करोड़ रूपए की रो-रो फेरी सेवा का शुभारंभ किया था. यह सेवा सौराष्ट्र के भावनगर जिले के घोंघा को भरूच जिले के दाहेज से जोड़ेगी. इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अशिवनी लोहानी ने कहा कि अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन ५०८ किलोमीटर की दूरी तीन घंटे में तय करेगी यह परियोजना २०२२ तक पूरी होगी.

विकसित देशो से अवश्य वैसे तकनिक सीखने की जरुरत है ताकि अमीरी और गरीबी की खाई न बढे. सीधी सी बात है साधारण आदमी सड़क का इस्तेमाल बहुत कम करते है ज्यादातर कोई न कोई व्यवसाय से जुड़े लोग ही सामान का यहां से वहां भेजने के लिये सड़क का इस्तेमाल ज्यादा करते है. एक ही साल में लाखो व्यापारी को देखा गया है अपनी संपति को कई गुणा बढ़ा लेते है उनको हर प्रकार की सुविधा मिलती है, बैंक से सस्ते और आसान लोन हो या सरकारी लाभ जिसके कारण एक दशक में कितने व्यापारी लाखो की पूंजी से अरबपति हो जाते है गरीब और माध्यम वर्ग के दम पर, और देखा गया है की न्यूनतम मजदूरी जो सरकार अभी तय कर रखी है कितने आदमी को मिलता है? फिर भी देखा जा रहा है बड़े बड़े व्यापारी एक जुट होकर अपनी और सुविधा की मांग के लिये सरकार पर दवाब बना रहे है क्युकि इनकी भूख तो बड़ी है पर दिल बड़ा नहीं है. जबतक हम देश की इस खराब सिस्टम प्रणाली में व्यापक सुधार नहीं करेंगे तबतक देश को विकसित होने का सवाल ही नहीं बनता है. समय के साथ चलने के लिये सबो को साथ लेकर चलने की जरुरत है.

LEAVE A REPLY