प्रणव दा की रणनीति 

प्रणव दा की रणनीति 

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प्रणव मुखर्जी की हालिया रिलीज़ किताब में भी इस बात का शिद्दत से जिक्र है कि कैसे जब यूपीए सरकार ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया था तो प्रणव दा इस बात को लेकर अपसेट हो गए थे. प्रणव दा इसी थ्योरी को लेकर फिर से सामने आए है की कांग्रेस के अभ्युदय से लेकर यूपीए सरकार बनने तक कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग सॉफ्ट हिंतुत्व को पोषित करता रहा है और ऐसे में हिंदूवादी नेताओं की कांग्रेस में एक पुरानी परंपरा रही है. यही कारण है की राहुल गाँधी मंदिरों में शीश नावाने पहुच जाते है. ये बात भी सच है की राहुल के मुकावले प्रियंका गाँधी से प्रणव दा की ज्यादा छनती है. अकेले गुजरात में राहुल दर्जन भर के मंदिरों में जा चुके है. कांग्रेस में एन डी तिवारी, जनार्धन द्युवेदी, मोतीलाल वोरा, सतव्रत चातुर्वेदी, मनीष तिवारी और शीला दीक्षित यानी कांग्रेस ने साफ्ट हिंदुत्व के जिस स्लॉट को पिछले १२-१३ साल से अनदेखा कर दिया था उसकी भरपायी करने की कोशिश है.


अगले २०१९ के लोकसभा चुनाव में शत्रुधन सिन्हा की जगह रितुराज की तैयारी है. जैसे की पटना साहिब संसदीय सीट से टिकट कटना तय माना जा रहा है. भाजपा से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते है कि पटना साहिब से अगला चुनाव रितुराज सिन्हा लड़ सकते है, जो कि सेक्युरिटी सर्विस एसआईएस चलाने वाले आर के सिन्हा के पुत्र है. आर के सिन्हा फिलहाल राज्यसभा सांसद है और संध के बेहद करीबियों में शुमार होते है. रितुराज सिन्हा यूके की लीड्स विश्वविद्यालय से पढ़े है. बिहार के २०१४ के विधानसभा सभा चुनाव में भाजपा का आईटी सेल संभाला था, और २१५ नमो रथ को जीपीएस की एक विशेष तकनीक से जोड़ा था.
नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में जाने के बाद से ही भाजपा को एक स्टार फेस की तलाश है. विश्वस्त सूत्र की माने तो पूर्व क्रिकेटर कपिलदेव शीघ्र ही भाजपा में आ सकते है. सूत्रों की माने तो इस बाबत कपिलदेव की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से एक निर्णायक बातचीत हो चुकी है. दिवंगत विनोद खन्ना की सीट गवाने के बाद भाजपा सदमे में है और पार्टी उम्मीद अब कपिलदेव पर टिक आयी है.
ममता बनर्जी पर जब से अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति करने के इल्जाम जोरो से लगने लगे है, तब से कोलकाता के रामकृष्ण मिशन आश्रम में आना जाना बढ़ गया है, इन दिनों वो आश्रम में घंटो बैठी रहती है, उनके समर्थक इसे शांति की खोज बता रहे है. मोदी जी को लगातार रिपोर्ट मिल रही थी की गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री रुपानी जी से जनता नाराज है इसलिये गुजरात में अनेको कार्यक्रम किये जा रहा है.
अब देखना ये है की देश की राजनीति में राजनीति हावी होती है की कर्मनीति, क्युकि सरकार कोई भी पार्टी चलाये तीसरे पार्टी भी चला सकती है जनता को तो उपयुक्त सुविधा से मतलब है जो देश की आज़ादी के बाद से अभी तक करोडो जनता को नहीं मिला है. अब आने वाला वक्त बताएगा की क्या नया होने वाला है वैसे सभी छोटे छोटे पार्टी भी एक होने के मुहीम में लगे है, इसलिये की उन्हें पता चल रहा है की तेज़ और आदर्श बदलाव के लिए नये पीढ़ी के साथ सब मिलकर एक होने चाहिये, और अपने अंदर की नकारात्मक सोच को बदलना चाहिए, लालच को त्यागकर सभी जनता के लिए काम करना चाहिए. देश को अखंड बनाने में अमूल्य त्याग और जोर देना चहिए.

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