भारत के तीन लाख युवाओं को ऑन-जॉब ट्रेनिंग देगा जापान

भारत के तीन लाख युवाओं को ऑन-जॉब ट्रेनिंग देगा जापान

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भारत के साथ बुलेट ट्रेन का सौदा करने के बाद अब जापान भारत के तीन लाख युवाओं को ऑन-जॉब ट्रेनिंग देगा.
धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ने बुधवार (11 अक्टूबर) को बताया कि भारत तीन लाख युवाओं को ऑन-जॉब ट्रेनिंग के लिए जापान भेजेगा, ट्रेनिंग 3-5 साल की होगी. यह सरकार के स्किल डेवल्पमेंट प्रोग्राम का हिस्सा होगी और इसका पूरा खर्चा जापान उठाएगा.  सबसे बड़ी बात है की नये टेक्नोलॉजी को सीखने का मौका मिल रहा है.
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री प्रधान ने कहा कि 16 अक्टूबर को वह तीन दिन के टोक्यो दौरे पर जाएंगे और वहीं पर इस मेमोरेंडम ऑफ कॉर्पोरेशन (MOC) पर साइन किए जाएंगे. प्रधान ने इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है.
प्रधान ने बताया कि तीन लाख युवाओं में से पचास हजार युवाओं को वहीं नौकरी मिलने के चांस हैं और बाकी लोग भारत आकर यहां के उद्योग में बढ़ावा देंगे. खबरों के मुताबिक, इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे.
पेट्रोल और डीज़ल की भारत मे बढ़ती मांग को देखते हुए दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी सऊदी आर्मको जल्द ही महाराष्ट्र में 40 हजार करोड़ का निवेश करने जा रही है. रकम बड़ी है, कंपनी  ने रविवार को भारत में अधिकारिक तौर पर अपना कार्यालय शुरू कर दिया है. आर्मको ने एनसीआर के पास हरियाणा के गुरुग्राम में अपना कार्यालय खोला है.
गुरुग्राम में आर्मको के उद्घाटन के मौके पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद थे. प्रधान ने ट्विट के जरिए जानकारी देते हुए कहा कि भारत, सऊदी अरब के लिए तेल और एलपीजी का सबसे बड़ा बाजार है. माना जा रहा है की हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में यह कदम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करेगा.
अब कंपनी इसके लिए इंडियन ऑयल के कंशोर्शियम के साथ मिलकर के महाराष्ट्र में जल्द ही नई रिफाइनरी बनाने जा रही है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ महीने पहले तक भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति के मामले सऊदी अरब था, लेकिन पिछले 5 महीने से इराक ने यह जगह ले ली है. इसके साथ ही सऊदी अरब अब दूसरे स्थान पर चला गया है.
अब इस्राइल ने भारत की दो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को अपने यहां खोजे गए नए गैस क्षेत्रों में निवेश और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के लिए दीर्घ अवधि के करार के लिए आमंत्रित किया है. इस्राइल से यह न्योता पाने वाली कंपनियां ओएनजीसी की विदेशी इकाई ओवीएल और गेल हैं
इस्राइल का यह आमंत्रण एक ओर जहां इन सरकारी कंपनियों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल सकता है, वहीं दूसरी ओर इस्राइल की तरफ कदम बढ़ाने पर  तेल उत्पादक देश नाराज हो सकते है. इस्राइल की इस पेशकश की ओर कदम बढ़ाने को लेकर मोदी सरकार ने फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है. इसकी वजह यह है कि सरकार इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि ऐसा करना भारत को सबसे ज्यादा तेल व गैस की आपूर्ति करने वाले सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशो को नाराजगी होगी. इन देशों के इस्राइल से रिश्ते खुशगवार न होने के चलते ऐसा होने की काफी हद तक संभावना है. सरकार की यह आशंका बेवजह भी नहीं है. सरकार को ऐसा एक झटका फरवरी 2012 में लगा था, जब कुवैत ने इस्राइली कंपनियों से कारोबार के चलते इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि यह प्रतिबंध ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला और फिलहाल आईओसी कुवैत से तेल और गैस दोनों का ही आयात कर रही है.
इस्राइल ने ओवीएल और गेल को गहरे समुद्र में स्थित दो गैस क्षेत्रों से भारी मात्रा में एलएनजी के आयात के लिए दीर्घकालिक करार करने के लिए आमंत्रित किया है. अमेरिका की ओर से किए गए भूगर्भीय सर्वेक्षण के मुताबिक भूमध्य सागर स्थित इन क्षेत्रों में 3,455 बीसीएम प्राकृतिक गैस और 1.7 अरब बैरल तेल मौजूद है. वर्ष 2010 में खोजा गया यह भंडार पिछले दशक में खोजा गया तेल व गैस का सबसे बड़ा भंडार है. इससे गैस का उत्पादन 2017 तक शुरू हो जाने की उम्मीद बन रही है.
तमाम कामो को देखते हुये अभी विश्व की लगभग 8 अरब आबादी को तेल और गैस के भयंकर प्रदुषण से निपटने के लिये सौर्य उर्जा का अधिक उपयोग और इलेक्ट्रिक और लिथियम बैट्री पर आधारित जितना जल्द हो सके काम करने की जरुरत है. परमाणु शक्ति, का उपयोग इलेक्ट्रिक के लिये और समुंद्री साल्ट का उपयोग लिथियम बैट्री के लिये, क्युकी इन तीनो वस्तुओ की अपार भंडार है.

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